विंध्याचल पर्वत माला | vindhyachal parvat Info For UPSC

Vindhyachal Parvat (विंध्याचल पर्वत माला) | आज के इस फ्रेश और नए article में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। अगर आप छोटे से लेकर बड़े जैसे upsc कॉम्पिटिटिव एग्जाम की preparation कर रहे है तो विंध्याचल पर्वत (vindhyachal parvat) से जुड़े साड़ी जानकारी इस post में देखने को मिलेगी। Vindhyachal mountain range

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  • विंध्य रेंज (Vindhya range)
  • विंध्याचल माउंटेन रेंज (Vindhyachal mountain range)

vindhyachal parvat – विंध्याचल पर्वत माला

विंध्याचल का पर्वत भारत के maps के अनुसार मध्य में पश्चिम भाग में है जो देश के उत्तर भारत (north India) भाग और दक्षिण भारत (South India) के भाग को अलग- अलग बांटती है। यह एक प्राचीन पर्वत श्रंखला (Mountain Range) है।

vindhyachal parvat
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Vindhyachal mountain range | विन्ध्याचल पर्वत श्रृंखला (vindhyachal parvat) का विस्तार भारत के चार राज्यों गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, और बिहार में है। और इस माउंटेन रेंज की लम्बाई या फैलाव लगभग 1,086 किलोमीटर तक है। यह पर्वत माला मध्य प्रदेश से निकलकर उत्तर प्रदेश में वाराणसी (बनारस) में गंगा नदी घाटी में जाकर मिल जाती है।

विन्ध्याचल पर्वत श्रृंखला मध्य भारत और मालवा का पठार के दक्षिण छोर की तरफ है। इसके बाद शाखाओं में विभाजित हो जाते हैं- कैमूर श्रेणी- सोन नदी के उत्तर से पश्चिमी बिहार राज्य तक तथा दक्षिणी शाखा, जो सोन और नर्मदा नदी के ऊपरी क्षेत्र के बीच मैकाल पहाड़ी (अमरकंटक पठार) में सतपुड़ा पर्वत श्रेणी पर मिलती है।

सतपुड़ा पर्वत की तीन प्रमुख पहाड़िया राजपीपला, महादेव, मैकाल है। सतपुड़ा की सबसे ऊंची चोटी धूपगढ़ (1350) मीटर है। धूपगढ़ सतपुड़ा की पहाड़ी महादेव पर है। महादेव पहाड़ी यानी धूपगढ़ की छोटी के पास से ताप्ती नदी का उद्गम हुआ है। इसके अलावा अमरकंटक पठार (मध्य प्रदेश) यानी उतर में कैमूर और दक्षिण में मैकाल दोनों से समीप छोर से नर्मदा नदी का उद्गम हुआ है।

विंध्याचल पर्वत की सबसे ऊंची चोटी अमरकंटक है जो की मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में है। इसकी ऊंचाई 1048 मीटर की है। विंध्याचल (vindhyachal parvat) सफ़ेद शेर के लिया popular है और उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर में है।

vindhyachal mountain range
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विंध्याचल नर्मदा नदी और कर्क रेखा के समान्तर पर्वत श्रेणी है।

विंध्याचल पर्वत के उतर क्षेत्र मे चंबल, बेतवा, केन और टोन्स, तमसा, काली सिंध, सोन, पार्वती नदिया है। इसमें खनिजों की मात्रा भरपूर होती है। इसमें खनिज पदर्थ जैसे – लाल पत्थर, चूना पत्थर, रेट, डोलोमाइट, बलुआ पत्थर इत्यादि होते है।

विंध्याचल पर्वत श्रेणी के पूर्व भाग को भांडेर हिल्स या भांडेरखांड़ पठार कहा जाता है।

इस पर्वत श्रंखला का दक्षिणी ढ़लान खड़ा और उत्तरी भाग की ढ़लान काफी मंद है और इसके उत्तरी ढ़लान पर मालवा का पठार1, बुंदेलखंड पठार2, मांडेरखड पठार3, बघेलखण्ड पठार4 (पश्चिम से पूर्व) है। मालवा का पठार पर काली मिटटी का है और इसके अलावा तीन शेष पठार लाल मिटटी (red soil) पायी जाती है। इसलिए मालवा के पठार पर कपास की खेती बहुत अधिक होती है।

विन्ध्य का अर्थ – Vindhya Meaning

विन्ध्य का अर्थ ‘विध्’ धातु से है। विंध्य की गणना सप्तकुल पर्वतों है। विंध्य का नाम पूर्व वैदिक साहित्य में निहित नहीं है। विंध्याचल पर्वत का घिस घिस कर टीले में कई भागो में विभाजित हो गए।

विंध्यवासिनी माता का मंदिर – Vindhyawasini mata ka mandir

विंध्यवासिनी माता का मंदिर एक बहुत ही प्रसिद्द temple है। इसको योगमाया भी कहा जाता है और यह माँ दुर्गा का मंदिर है। विंध्यवासिनी माँ का दरबार उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे मिर्जापुर शहर से लगभग 8 किलोमीटर की distance पर vindhyanchal में है।

इस मंदिर में माँ दुर्गे तीन यंत्रो पर विराजमान है जो अलग – अलग रूप धरण महालक्मी, सरस्वती, महाकाली है। विंध्यवासिनी माँ का नाम विंध्यांचल पर्वत के नाम पर पड़ा।

माना जाता है माता सती की अंग के 51 टुकड़े हुए थे और वो अलग – अलग क्षेत्र में गिरे जिससे आज 51 शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है। यहाँ उन 51 शक्ति पीठ में से 1 शक्ति पीठ है।

भगवत के अनुसार माँ शक्ति (विंध्यवासिनी माँ) का जन्म यशोदा की गर्भ से हुआ। ठीक देवकी के गर्भ से वशुदेव की आठवीं संतान श्री कृष्ण का जन्म हुआ। उस टाइम देवकी और वशुदेव दोनों कंश के बंदीगृह में बंदी थे। इसके बाद वशुदेव श्री कृष्ण को यशोदा के पास और यशोदा के गर्भ में जन्मी बच्ची को कारागार में वापिस ले आते है।

इसके बाद जब कंस को पता लगता है तो वह उस्कोमॉरने के लिए करता है। जब वह मारने के लिए पत्थर पर फैकता है वह अपने आप गायब हो जाती है और उसके 51 अंग अलग – अलग जगह पर पद जाते है।

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