भारत की मिटटी के प्रकार | Types of Soil In India

Types of Soil In India (भारत की मिटटी के प्रकार) | हेलो दोस्तों, इस वेबसाइट पर नई और फ्रेश आर्टिकल में आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है। आज के इस पोस्ट में भारत में मिटटी कितने प्रकार की होती हैं? (How many types of soil in India) और भारत के मानचित्र में मृदा के प्रकार – Types of Soil in India Map के बारे में इस पोस्ट में हम चर्चा करने वाले हैं।

भारत में मिटटी के प्रकार – How Many Types of Soil in India

How Many Types of Soil in India | हमारे भारत देश एक विशालकाय देश है और इसमें विभिन्न प्रकार की मिट्टिया (Different type of soil) पायी जाती है। आमतौर पर भारत की मिटटी का सर्वेक्षण (Survey of Indian Soil) देश के सरकारी व गैर सरकारी संघटनो द्वारा किया जाता है।

Types of soil in India |सॉइल (soil) कितने प्रकार की होती है, मिटटी का विभाजन Indian Council Agricultural Research Institute Delhi (ICAR) और Indian Institute of Soil Science (IISC) के आधार पर मृदा के प्रमुख प्रकार (Major type of Soil) की जानकारी निचे दी जा रही है।

भारतीय मृदा विज्ञानं संस्थान – इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ सॉइल साइंस की स्थापना 1988 में मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में की गयी। इसके प्रेजिडेंट A.K महापात्रा है।

Major type of Soil in India 2021

List of Soil in India

List of Soil in India| इंडिया में आठ प्रकार की मिट्ठिया (8 major types soil in India) पायी जाती हैं। मृदा क्या है? (What is Soil), मृदा पृथ्वी की सबसे ऊपर की ढीली परत होती हैं और इस परत पैर पेड़- पौधे उगते हैं। Types of soil in India.

मृदा को अंग्रेजी में सॉइल (Soil) कहते है जिसकी उत्पति लैटिन भाषा के शब्द Solum से हुई हैं।

  1. पर्वतीय मृदा (Mountain Soil)
  2. जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil )
  3. काली मृदा (Black Soil)
  4. लाल मृदा (Red Soil)
  5. लैटराइट मृदा (Laterite Soil)
  6. मरुस्थलीय मृदा (Desert Soil)
  7. पीट-दलदली मृदा (Peaty & Loam Soil )
  8. लवण व क्षारीय मृदा (Salt and alkaline soil)

मिटटी निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक – Factors Affecting Soil Formation

  • पैतृक शैल (Parents Rock)
  • जलवायु (Climate)
  • वनस्पति (Vegetarian)
  • भूमिगत जल (Underground Water )
  • सूक्षम जीव (Micro Organism)

Composition of Soil Chart

मिटटी की रचना (Composition) में 5 तत्वों का महत्पूर्ण योगदान होता है । मिटटी की रचना में बहुत अधिक (The best Soil Composition) मात्रा में खनिज पदार्थ (Minerals) होता है। मिटटी में खनिज पदार्थ की मात्रा का Percentage 40% से 45% होता है । Types of soil in India

चार्ट डेल यहाँ पर

  1. खनिज पदार्थ (मिनरल्स) 40% -50%
  2. ह्यूमस या कार्बनिक पदार्थ (Humus) 5%-10%
  3. मृदा वायु (एयर) 25%
  4. मृदा जल (वाटर) 25%
  5. सूक्षम जीव (माइक्रो ऑर्गैनिस्म) Remaining

विश्व मृदा दिवस (World Soil Day) कब मनाया जाता है? – 5 सितम्बर और मृदा दिवश को 2014 से मनाया जा रहा है

World Soil Day

What is ICAR Full Forms? ICAR का पूरा नाम भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् है। ICAR की स्थापना 16 जुलाई 1929 में हुई। इसके बाद दोबारा स्थापना 1956 में की गयी। ICAR  पूरा नाम अंग्रेजी में Indian Council of Agricultural Research है। इसका हेड क्वार्टर(HQ) नई दिल्ली(New Delhi) में है। भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् के वर्तमान प्रेजिडेंट नरेंद्र सिंह तोमर है जो मध्यप्रदेश के मुरैना Member of Parliament है और इसके डायरेक्टर त्रिलोचन मोहपात्रा है ।

ICAR – Indian Council of Agricultural Research, New Delhi

Major Soil Distribution in India Maps – भारत के मानचित्र में मिट्ठियो का वर्गीकरण

Major Soil distribution in India Maps | अगर आप इंडिया के मैप्स में मिटटी का वर्गीकरण (Soil Distribution) को देखने के लिए उत्सुक है तो निचे दिए गए मैप्स को ध्यान से देखे और इस पुरे आर्टिकल को ध्यान से पढ़े। इससे आपका Knowledge काफी अच्छा और इस टॉपिक को आप कभी नहीं भूल पाओगे। मेजर (Major) शब्द का अर्थ – प्रमुख है ।

मेजर टाइप ऑफ़ साइल के आधार पर गूगल सर्च के आधार पर मैप्स में प्रदर्शन पर मिट्ठियो के 6 प्रकार होते है। इन 6 प्रकार की मिट्ठियो में एक मिटटी रेतीली मिटटी (Arid Soil) होती है । यह Arid Soil मिटटी राजस्थान के लगभग कुछ क्षेत्र में पायी जाती है ।

Major Soil of India maps
Major types soil in India Maps

How many types of Soil in India. Types of soil in India | How many different types of soil in India.

भारत में सर्वाधिक मात्रा में पाए जाने वाली मिटटी

भारत में सर्वाधिक मात्रा में पाए जाने वाली मिटटी सबसे पहले नंबर पर जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) है।

NO.Soil NameValue (Percentage)
1.Alluvial Soil43%
2.Red Soil18%
3.Black Soil15%
4.Laterite Soil3% – 4%
High Volume/Area Soil List

भारत की मिटटी में तीन ऐसे पदार्थ यह तत्व (Elements) है जिनकी कमी होती है।

  • ह्यूमस (Humus)
  • नाइट्रोजन (Nitrogen)
  • फॉस्फोरस (Phosphorus)

अम्लीय मृदा और क्षारीय मृदा (Acid Soil and Alkaline Soil)

??अम्लीय मृदा (Acid Soil)क्षारीय मृदा (Alkaline Soil)
PH ValuePH का मान 7 से कम PH का मान 7 से अधिक
Rainअधिक वर्षा के क्षेत्र में अम्लीय मृदाकम वर्षा के क्षेत्र में Alkaline मृदा
Soilलेटराइट मिटटी (Laterite Soil), लाल मृदा (Red Soil)जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil)
HarvestTea, Coffie, Spices (Masale)धान, गन्ना, जवार, दाल व अन्य
अम्लीय मृदा और क्षारीय मृदा (Acid Soil and Alkaline Soil)

मृदा/मिटटी (Soil)

मिटटी या मृदा क्या है? इसके बारे में लगभग सभी लोग परिचित होंगे। मिटटी पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत (Layer) होती है। वैसे तो पृथ्वी (The Earth) का निर्माण बहुत सारी मिटटी परतो (Soil Layers) और अन्य के द्वारा होता है। मृदा या मिटटी का निर्माण खनिज, जैविक पदार्थ, बैक्टीरिया आदि के मिश्रण के द्वारा होता है।

हमारी पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत (Soil layer on earth) पर मौजूद मिटटी का निर्माण बारीक मिटटी के कण, गले हुए पेड़- पौधे और जीवो के अवशेष से हुआ है। बहुत सारे सालो पहले पृथ्वी के विनाशलीला दिखने के कारण धरती पर रहने वाले जीवो के उथल-पुथल होने के कारन ये सब जीवाश्म बन गए और धीरे धीरे मिटटी में तब्दील हो गए। पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत को टॉप सॉइल (Top Soil) कहा जाता हैं।

पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत की मृदा फसल की सर्वोत्तम पैदावार के लिए सबसे अच्छी मिटटी है, इसमे ह्यूमस (Humus) सबसे अधिक होती है। इसके बाद दूसरी परत महीन कण (small Particle) और चिकनी मिटटी युक्त होती है। इस परत को Sub Soil कहा जाता है।

पृथ्वी में मिटटी की तीसरी परत बड़े-बड़े कंकड़ पत्थर से निर्मित होती है। जैसे ही हम गहराई में जाते है तो मृदा या मिटटी का गुण में कमी आ जाती है ।

मिटटी या मृदा के अध्यंयन को क्या कहते है? इसका जवाब हम आपको बता देते है मृदा के अध्ययन करने के विज्ञान (Science study of soil ) को मृदा विज्ञान (Pedology) कहा जाता है।

फोटो डेल यहाँ

जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil)

जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) | इस मिटटी को काँप मृदा या कछारी मिटटी भी कहा जाता है। जलोढ़ मृदा नदियों के द्वारा बहकर आयी हुई मिटटी है जो पानी धीरे धीरे सोखने के बाद किनारो पर जमा हो जाती है। जलोढ़ मृदा गंगा, यमुना, सतलज, घाघरा, गंडक, ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों द्वारा निर्माण होता है।

जलोढ़ मृदा की विशेषताएं – जलोढ़ मृदा (Alluvial soil) भारत की सबसे उपजाऊ मृदा है। यह मिटटी भारत के लगभग 43% भू-भाग पर है और यह एक क्षारीय मृदा (Alkaline Soil) है जिसका पीएच मान (PH Value) 7.4 से 8.3 या 7 है।

जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) भारत के दो क्षेत्रो उतर मैदान और तटीय मैदानों में पायी जाती है। इस मृदा में पोटास बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है किन्तु Alluvial soil में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, और ह्यूमस कम मात्रा में पाया जाता है।

जलोढ़ मृदा के प्रकार – Types of Alluvial Soil

जलोढ़ मृदा (Alluvial soil) दो प्रकार की होती है।

  1. खादर (Khadar)
  2. बांगर (Bangar)
खादर (Khadar)बांगर (Bangar)
नया जलोढ़ पुराना जलोढ़
उपजाऊ क्षमता अधिक होती हैउपजाऊ क्षमता कम होती है
पानी की मात्रा अधिक होती हैपानी की मात्रा कम होती है
कम क्षारीय मृदा होती हैअधिक क्षारीय मृदा होती है
खनिज अधिक मात्रा में होते हैखनिज कम मात्रा में होते है
KhadarBangar
Khadar and Bangar

काली मृदा – Black Soil

काली मृदा (Black Soil) | काली मिटटी को कपासी मृदा, रेगुर मृदा (Regur Soil) या लावा मृदा के नाम से भी जाना जाता है। काली मिटटी महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्यप्रदेश राज्यों में पाई जाती है। उत्तर प्रदेश के झांसी व ललितपुर में भी काली मृदा पायी जाती है वह इस मृदा को करेल मृदा कहा जाता है।

काली मृदा को इंटरनेशनल लेवल पर चरनोजम कहा जाता है। काली मृदा (Lava Soil) या लावा मृदा का निर्माण जवालामुखी से निकलने वाले लावा जमा होकर चट्टान में बदल जाता है जो बाद में टूटने से शैली से हुआ है।

सबसे अधिक मात्रा में काली मिटटी (Black Soil) महाराष्ट्र राज्य में पायी जाती है। इस मिटटी में जल को सोखने की शमता बहुत अधिक होती है।

काली मिटटी का रंग काला टिटेनिफेरस मैग्नेटाइट व मिटटी में ह्यूमस होने के कारण होता है। ब्लैक सॉइल में आयरन, चूना, अलुमिनियम, एवं मेग्नेशियम बहुत अधिक मात्रा में उपस्थित रहते है।

रेगुर सॉइल (Regur Soil) कपास की खेती के लिए सबसे अच्छी मृदा है। काली मृदा का दूसरा नाम काली कपास मृदा के नाम से भी पुकारा जाता है।

काली मिटटी (Black Soil) या रेगुर साइल (Regur Soil) में केला, ज्वार, गन्ना, तम्बाकू, मूंगफली, और सोयाबीन की सबसे अच्छी फसल लगाई जा सकती है।

लाल मिटटी – Red Soil

लाल मिटटी (Red Soil) का लाल रंग आयरन ऑक्साइड की प्रचुरता के कारन दिखाई देता है। रेड साइल का निर्माण जलवायु बदलने के कारन रेवडार और कायांतरित चट्टानों के विघटन या वियोजन से होता है।

लाल मिटटी में सिलिका और आयरन अधिक मात्रा में पाया जाता हैं।

लाल मृदा पहाड़ियों पर उपजाऊ नहीं होती है और कांकडली होती है लेकिन निचे मैदानी भागो में उपजाऊ होती है। भारत के तटीय क्षेत्र और काली मिटटी के क्षेत्रों कोछोड़कर सम्पूर्ण प्रायद्वीपीए पत्थर में लाल मिटटी पायी जाती है।

लाल मिटटी को पीली मिटटी भी कहा जाता है। इस मिटटी का पीला रंग जलयोजित होने के कारन होता है।

इस मिटटी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस की मात्रा में कमी रहती है। पीली या लाल मिटटी में कपास, गेहू, मोठे अनाज, और डाले उगाई जा सकती है। इस मिटटी में उर्वरता बढ़ने के लिए चूना का इस्तेमाल किया जा सकता है।

भारत में लाल मिटटी(Red Soil) आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश का पूर्वी भाग, छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र, पश्चिम बंगाल के उत्तर पश्चिमी जिले, मेघालय की गारो, खासी और जयंतिया की पहाड़िया, नागालैंड, राजस्थान में अरावली के पूर्वी क्षेत्र, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्णाटक, के भागो में पायी जाती है।

लेटराइट मृदा – Laterite Soil

Laterite Soil |लेटराइट मिटटी का निर्माण मानसूनी जलवायु की आद्रता और शुष्कता के कर्मानुसार बदलाव के विशिस्ट परिस्थितियों के कारन होता है।

लेटराइट मृदा में आयरन और एल्युमीनियम, सिलिका के ऑक्साइड प्रचूर मात्रा में पाया जाता है जिसके कारन इसका रंग लाल होता है। इसके अलावा लेटराइट साइल में ह्यूमस, नाइट्रोजन,फॉस्फोरस, पोटाश की मात्रा में कमी होती है। यह मृदा लाल मृदा से काम उपजाऊ होती है।

लेटराइट मृदा में चाय, कॉफी,मसाले, काजू इत्यादि उगने के लिए उपयुक्त होती है। लेटराइट मिटटी (Laterite soil) ऊचे-नीचे स्थानों पर मिटटी पतली और कंकडयुक्त होती है, किन्तु मैदानी भागो में लेटराइट मृदा में कृषि की जा सकती है।

लेटराइट मृदा (Laterite soil) का सबसे अधिक भाग केरल और महाराष्ट्र में है। इसके अलावा यह मृदा तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा के भाग, साउथ इंडिया का पठार, राजमहल, छोटा नागपुर का पठार और असम के क्षेत्रो में पायी जाती है।

काली मिट्टी का रंग काला क्यों होता है?

types of soil in india

काली मिटटी का रंग काला टिटेनिफेरस मैग्नेटाइट व मिटटी में ह्यूमस होने के कारण होता है। काली मिटटी को कपासी मृदा, रेगुर मृदा (Regur Soil) या लावा मृदा के नाम से भी जाना जाता है।

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